दिसम्बर 14, 2017

GE तथा टाटा समूह ने भारत में LEAP इंजन के घटक बनाने के लिए एक रणनैतिक साझेदारी की है

सम्मिलित रूप से रक्षा इंजनों तथा विमानन प्रणाली अवसरों की भी खोज करेंगे

  • भारत में निर्मित CFM LEAP इंजन के पुर्जे GE के वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रयुक्त किए जाएंगे
  • यह भागीदारी मेक इन इंडिया अभियान के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है

मुंबई, भारत& सिनसिनाटी, सं.रा.अमेरिका: GE तथा भारत के अग्रणी वैश्विक उद्यम, टाटा समूह ने आज घोषणा की है कि उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आपूर्ति के लिए, भारत में CFM इंटरनेशनल LEAP इंजनों के घटकों के निर्माण के लिए, 29 नवंबर, 2017 को एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं। इन दोनों कंपनियों ने भारतीय बाजार में रक्षाबल इंजनों तथा विमानन प्रणालियों के अवसरों की सम्मिलित रूप से तलाश करने के उद्देश्य की भी घोषणा की है। यह LEAP दुनिया का सबसे अग्रणी जेट इंजन है जिसे इसकी प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता, ईंधन कार्यकुशलता, तथा एकल पार्श्व वाणिज्यिक जेट को शक्ति देने में कार्यकुशलता  के लिए जाना जाता है।

जॉन फ्लानेरी, अध्यक्ष तथा सीईओ, GE, टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन के साथ

“टाटा समूह भारतीय रक्षा तथा विमानन सेक्टर में अग्रणी है, और हम LEAP इंजनों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए साथ मिलकर काम करने की आशा करते हैं। नवाचारी प्रौद्योगिकी बनाने में हमारी भागीदारी से भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को समर्थन प्राप्त होगा”, जीई के सीईओ तथा अध्यक्ष जॉन एक फ्लानेरी ने कहा।

“हम और भी विशेषज्ञताएं निर्मित करने तथा भारत की ‘रक्षा उत्पादन क्षमताओं’ को और मजबूत बनाने के लिए जीई के साथ मिलकर काम करने की आशा करते हैं,” टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने कहा। जीई के साथ टाटा समूह की भागीदारी से हमारे रक्षा बलों के समर्थन के लिए रक्षा उत्पादन तथा नवाचार पर संकेंद्रण में सहयोग को बल मिलेगा।”

इस रणनैतिक भागीदारी के तहत, जीई एविएशन तथा टाटा संस की अनुषंगी कंपनी, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL), साथ मिलकर विमानन के घटकों के विनिर्माण, संयोजन, समेकन तथा परीक्षण में सहयोग करेंगे। भारत में विमान इंजनों के विनिर्माण तथा उससे संबंद्ध क्षमताओं के निर्माण के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने में सहयोग के उद्देश्य से एक नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) स्थापित किया जाएगा।

जीई रक्षा इंजनों का भारत में एक अच्छा इतिहास रहा है।  जीई फिलहाल विभिन्न भारतीय रक्षा कार्यों के लिए जेट इंजन तथा मेरीन गैस टर्बाइन उपलब्ध कराते हैं, जिनके तहत शामिल हैं, वायुसेना का हल्का लड़ाकू विमान- तेजस एमके 1, भारतीय नौसेना का पी-81 विमान, तथा पी-17 श्रेणी के लड़ाकू विमान। विभिन्न रक्षा कार्यक्रम जिनपर काम चल रहा है, उनमें शामिल हैं हल्के लड़ाकू विमान- तेजस एमके 2, पी-17ए & पी-71 पोत, तथा एएच-64 लड़ाकू हेलीकॉप्टर जिनमें शक्ति के लिए जीई इंजनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

TASL विमानन, रक्षा तथा घरेलू सुरक्षा के क्षेत्रों में समेकित समाधान उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहा है। ग्लोबल ऑरिजिनल इक्विपमेंट मेन्यूफैक्चरर (OEMs) का एक प्रमुख उत्पादन सहयोगी बनते हुए, यह वैश्विक विमानन बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गया है। इसमें डिजाइन से लेकर पूर्ण विमान संयोजन तक संपूर्ण विमानन मूल्य श्रृंखला की क्षमता मौजूद है।